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डीपीसी मामला -नौकरी भोपाल में वेतन शहडोल से ????

शहडोल|जिला शिक्षा केंद्र सर्व शिक्षा अभियान कि अनियमित्ताओ कि जितनी भी चर्चा कि जाय कम है | मामला अगर मुन्ना भैया कोतमा विधानसभा का हो तो चार चाँद लग जाते है | हाई कोर्ट द्वारा स्टे हटाने के बाद 3 मार्च को कार्यमुक्त हुए जिला परियोजना समन्वयक मदन  त्रिपाठी उर्फ़ मुन्ना भैया कोतमा विधानसभा की अनियमितताए थमने का नाम नहीं ले रही है |

वैसे तो मुन्ना भैया ने 7 मार्च 23 को कार्यालय छोड़ दिया था और आयुक्त लोक शिक्षण कार्यालय में उपस्थिति दे दी थी | यह बात अलग है कि उसके बाद भी शहडोल कलेक्ट्रेट एवं कोतमा विधानसभा की परिक्रमा करते रोज देखे जाते रहे है |मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में लगी उनकी ड्यूटी से खलबली मच गयी थी

राज्य शासन द्वारा उनकी नियुक्ति सहायक संचालक कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी अनुपपुर में उनकी पदस्थापना कर दी  है  जिसका विधिवत आदेश 3 मई 23 को कर दिया और उन्होंने वहां ज्वाइन भी कर लिया था |

पहले हम बता दे कि सर्व शिक्षा अभियान कोई विभाग नहीं है ,शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाली एक सोसाइटी इसे संचालित करती है इसके फण्ड अलग होते है | वित्तीय काम काज  सुचारू रूप से सञ्चालन हेतु आयुक्त कोष एवं लेखा का एक कर्मचारी ओमकार साकेत सहायक परियोजना समन्वयक (वित्त) के पद पर कार्यरत है | जिसका काम ही वित्तीय अनियमितता रोकना है ,लेकिन मुन्ना भैया कि सगत में पड़कर वह भी नियम तोड़ने में चोका एवं छक्का मारने से नहीं चुके है इनकी कलई तो लोकायुक्त एवं राज्य आर्थिक अपराध ब्यूरो कि जाँच में आगे खुलेगी |

ताजा मामला यह है कि मुन्ना भैया कि प्रतिनियुक्ति समाप्त हो गयी थी और वह मिशन के कर्मचारी पद से 3 मार्च को मुक्त हो गए थे | अब उन्होंने भोपाल में क्या नौकरी कि क्या छुट्टी ली ,क्या मेडिकल लिया ,बिना कार्यालय आयुक्त लोक शिक्षण भोपाल से  जानकारी लिए कोष एवं लेखा के कर्मचारी एपीसी (फाइनेंस) ओमकार साकेत ने इनका माह अप्रैल तक का वेतन बना दिया | अब फूल सिंह मारपची जो प्रभारी डीईओ एवं प्रभारी डीपीसी भी थे उनकी क्षमता तो बची नहीं कि नियम विरुद्ध होने वाले इस भुगतान को रोक सके |क्योकि इसमे मुन्ना भैया का 3 लाख से ऊपर वेतन शामिल था |इसलिए उन्होंने भुगतान कर दिया | प्रश्न यह है कि जिस कर्मचारी को मुक्त कर मूल विभाग भेजा गया उसका वेतन पूर्व विभाग से कैसे निकला |

सूत्रों के अनुसार  जाते जाते मुन्ना भैया यह अनियमितता भी कराकर् चले गए, इस बारे में जब हमने जानकारों से बात कि तो पता चला कि बिना भोपाल से आये ड्यूटी  प्रमाण पत्र के वेतन भुगतान सरासर गलत है | ऐसे कर्मचारी जिसकी प्रतिनियुक्ति भी समाप्त हो चुकी है उसकी इस अवधि के वेतन का भुगतान उस संस्था से किया जाता है ,जहाँ पर वह जाकर अपनी उपस्थित देवे |

आयुक्त शहडोल संभाग ,कलेक्टर शहडोल एवं जिला कोषालय अधिकारी से इस समाचार के माध्यम से अपील कि जाती है कि मामले को संज्ञान में लेकर अगर इसमे अनियमितता है तो दंडात्मक कार्यवाही किये जाने की अपेक्षा कि जाती है |

 

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