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शिव के राज मे ये कैसा कर्मचारी जिसको मिला अभयदान

शहडोल|शहडोल के बहुचर्चित डीपीसी श्री मदन त्रिपाठी उर्फ़ मुन्ना भैया कोतमा विधानसभा ने बिना सरकारी नौकरी छोड़े जिस प्रकार कोतमा विधानसभा में अपना प्रचार प्रसार कर रहे है इससे ऐसी अनुशासन हीनता प्रदेश में फ़ैल रही है, जिससे पुरे समाज में असंतोष व्याप्त है |मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण अधिनियम 1965का एवं लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 का खुला उल्लंघन कर रहे है |शहडोल,अनुपपुर के कलेक्टर एवं शहडोल कमिश्नर ने जिस तरह से आँखे मूंदी हुयी है लगता है कि कानून का राज्य मध्यप्रदेश में बचा ही नहीं है |इनके द्वारा पूर्व में किये गए घोटालो के लिए वर्ष 2018 से कमिश्नर को कार्यवाही के लिए भेजी गयी रिपोर्ट कि दुबारा जांच अभी तक पूरी नहीं हुयी और न ही दंड मिला है | साथ ही तत्कालीन अध्यक्ष जिला पंचायत श्री नारेन्द्र सिंह मरावी द्वारा काफी शिकायत की गयी, आन्दोलन किया गया ,पूर्व जिला पंचायतअध्यक्ष की शिकायत पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश में ही इन्हें 2018 में मूल विभाग वापस किया गया था |

लेकिन मुख्यमंत्री जी के निर्देश को भी धता बताकर माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर से स्टे लेकर मार्च 2023 तक एवं खूब भ्रष्टाचार किया जिसकी आये दिन शिकायते होती है,लेकिन प्रशासन ने कभी कार्यवाही नहीं की | सेवा में रहते हुए नित नवीन घोटाले कर  करोडो के आसामी बने कर्मचारी जिसने अपने पूरे परिवार को आधुनिक भागीरथ बनकर भ्रष्टाचार की गंगा में जिस तरह नहलाया है शायद ही किसी ने किया हो | लेकिन इसी बीच विधायक बनने कि महत्वकांछा उत्पन्न हो गयी एवं सेवा में रहते हुए शासकीय धन एवं प्रभाव से विगत 1 वर्ष से विधान सभा कोतमा में प्रचार चालू कर दिया |पत्रकारों को झूठी खबर दी कि मै VRS ले रहा हू| और आज तक VRS का आवेदन कही नहीं दिया | जबकि आज भी वह शासकीय सेवा में है वर्तमान में आयुक्त लोक शिक्षण भोपाल में पदस्थ है |

     जनचर्चा के अनुसार स्वयं  को भाजपा से जुडा एवं मुख्यमंत्री का करीबी बताने से भी कभी पीछे नहीं हटते? कांग्रेस की 13 महीने कि सरकार में कांग्रेस के बेहद करीबी बताते थे |

प्रशासन को है बहुत प्रिय – 

                      शहडोल प्रशासन का इनके प्रति प्रेम किसी से छुपा नहीं है | 7 मार्च को डीपीसी के पद से मुक्त करने के बाद भी प्रशासन ने इन्हें सर आँखों पर बिठा रखा है जिसका उदहारण मुख्यमंत्री जी के 5 अप्रैल को व्योहारी आगमन पर दी गयी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से परिलक्षित हुआ | मीडिया में खबरे आने के बाद इनको हटाया गया |

राजनैतिक गतिविधियो कि झलकिया-

मदन त्रिपाठी मुन्ना भैया कोतमा विधानसभा लिखकर फेसबुक पेज चलने वाले ,सभी समाचार पत्रों पर अपनी न्यूज़ चलाने में माहिर  मदन त्रिपाठी कमिश्नर एवं सांसद के साथ भी मंच साझा कर चुके है, स्वयं को भाजपा कि टिकट मिल गयी बताकर जिस तरह से राजनितिक गतिविधियों में संलग्न है यह तो मात्र कुछ उदाहरण ही है |

जो मुख्यमंत्री के साथ फोटो साझा कर भाजपा से संभावित उम्मीदवारी. पार्टी की अस्मिता,सुचिता,सुशासन पर भी सवाल उठता है | लेकिन पार्टी द्वारा इसका खंडन कभी नहीं किया गया |

 

क्या है प्रावधान –

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 129 व 134 ((क)) के प्रावधानों के अनुसार राज्य एवं केंद्र सरकार के कर्मचारी राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले सकते। संलिप्तता पाए जाने पर अधिनियम की धारा 129 के तहत दंडात्मक कार्रवाई, छह माह का कारावास जबकि धारा 134 क के उल्लंघन पर तीन माह का कारावास या जुर्माना अथवा दोनों सजाओं से दंडित किया जा सकता है। ,

एक कर्मचारी पर कार्यवाही इनको अभयदान क्यों ?-

दिनांक 27 मार्च 2023 को डॉ आनंद राय जो चिकित्सा अधिकारी हुकुमचंद हॉस्पिटल इंदौर में पदस्थ थे , जो व्यापम घोटाले के “Whistleblower”  थे एवं राजनीतिक गतिविधियों में सम्मलित थे| इनको शासन ने  सिविल सेवा आचरण अधिनियम 1965 का हवाला देते हुए  शासकीय सेवा से पृथक कर  दिया गया है|जबकि इनको प्रोत्साहित किया जा रहा है 

                            जिम्मेदारो से अपेक्षा कि जाती है कि इनके विरुद्ध भी कार्यवाही की जाये|

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