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मुन्ना भैया का जलवा, जाते जाते छोटे भैया का किया राजतिलक 

मुन्ना भैया का जलवा, जाते जाते छोटे भैया का किया राजतिलक 

शहडोल|नियम विरुद्ध कार्य करने के लिए हमेशा कुख्यात रहे, जिला शिक्षा केन्द्र के डीपीसी मुन्ना भैया के काले कारनामे किसी से छुपे नही है।कलेक्टर को ढाल बनाकर भ्रष्टाचार में संलिप्त मुन्ना भैया की पूरी टीम है,जो वर्ष 2012 से ताबड़तोड़ भ्रष्टाचार कर रही है।देश का मुखिया एवं भाजपा की सरकार जहां परिवारवाद का विरोध करते है।वही मुन्ना भैया कलेक्टरों के ऊपर वशीकरण प्रयोग कर पूरे परिवार को उपकृत करते रहे है । आज तक मीडिया और लोग यह नही समझ पाए कि ऐसा कौन सा मंत्र इनके पास है, जिसका प्रयोग करने से सभी कलेक्टर इनके बस में हो जाते है। उनके द्वारा बोले गए झूठ को ही सच मानते है एवं कानून एवं निर्देश नही पढ़ते है।

 शहडोल जिले में डीएमएफ का मद तो व्यक्तिगत मुन्ना भैया के उपयोग के लिए ही बनाया गया है। जिसमे सिर्फ एवं सिर्फ मुन्ना भैया को ही पूर्ण भ्रष्टाचार का एकाधिकार है।जिसके मद के लिए वह अपनी नोटशीट में कलेक्टर के हस्ताक्षर करा कर अभय दान प्राप्त करते रहे है। जनचर्चा है कि नोटशीट में कलेक्टरों के हूबहू हस्ताक्षर करने की भी इनकी एक टीम है।जिसकी प्रामाणिक चर्चा अगले एपिसोड में करेंगे?

आज तो चर्चा करेंगे हम परिवार वाद की, इस पर बहुत कुछ लिखना बांकी है। हमारे पास,इनके द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर, परिवार को उपकृत करने की कई जानकारियां है , लेकिन अभी हम सिर्फ एक की चर्चा करते है। यह सज्जन सहायक शिक्षक है, बुढार विकास खण्ड में,एकाउंट की कोई पढ़ाई इन्होंने नही की है लेकिन मुन्ना भैया के भाई है, यही इनकी सिर्फ और सिर्फ एक योग्यता है।जिसके बल पर यह सर्व शिक्षा अभियान के तमाम छात्रावासो में कई वर्षो से कही घोषित तो कही अघोषित रूप से लेखा पाल का दायित्व निभाते आ रहे है। इतने वर्षो में मुन्ना भईया को कोई दूसरा शिक्षक नही मिला जिसे ,छात्रावासो के लेखापाल का प्रभार दिया जा सके।

   वर्ष 2012 में दो दो आदेश जारी करना दिखाते हुए, उस समय 100 बच्चों के आवासीय ब्रिज कोर्स के खोले गए और फर्जी छात्रावास का इनको अकॉउंटेंट बना दिया जाता है। जो जांच का विषय रहा है।एवं कलेक्टर एवं सीईओ द्वारा की गई जांच में इनको दोषी पाया गया था, ये बात अलग है कि हमेशा की तरह आज तक कुछ नही हुआ।

ताजा मामला है कि मुन्ना भैया को जब लगा कि अब डीपीसी की कुर्सी तो चली गई अब क्या करे तो बैक डेट से,वर्तमान कलेक्टर को, जो इनके कागजो को कई बार बिना देखे ही हस्ताक्षर कर देती है ऐसी जनचर्चा है? के हस्ताक्षर से अपने सगे छोटे भाई को बिना चयन प्रक्रिया ,बिना योग्यता जांचे 250 सीट वाले बालक छात्रावास का प्रभारी वार्डन बना दिया, साथ ही अन्य चहेतो को भी प्रभारी अन्य होस्टल का लेखापाल बना दिया,ताकि आमदनी का स्रोत सूखने न पाए।

मैं जिले की लोकप्रिय कलेक्टर जी के ध्यान में यह लाना चाहता हूँ कि आप स्वयं नस्ती एवं निर्देश का परीक्षण कर सकते है। होस्टल का निरीक्षण करने को नही बोलूंगा क्योकि वहां पर मात्र 50 बच्चे ही नियमित रहते है, 250 बच्चे तो फर्जी लिखे है । अगर आप बताकर जांच करेंगे तो हो सकता है 300 से भी ज्यादा मिल जायेगे ।

सच कभी नही छुपता,

कलेक्टर एवं जिला मिशन संचालक से करबद्ध अनुरोध है की, मीडिया की बात का सिर्फ एक बार भरोसा करें एवं बीआरसी चयन एवं उनका पदांकन,होस्टल वार्डन पदाकन एवं खरीदी की नस्ती व नियम का परीक्षण मुन्ना भैया की जगह किसी और योग्य अधिकारी से कराकर देख ले, दूध का दूध एवं पानी का पानी साफ हो जाएगा। सादर??

शेष अगले अंक में…..

इनका कहना है :-

उक्त मामले मे जब जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मारपाची से जानकारी चाही गई तो पहले उनके द्वारा व्यस्त होना और कुछ देर बाद बात करने को कहाँ गया और जब हमारे द्वारा जानकारी के लिये प्रयास किया गया तो फ़ोन नहीं उठाया गया |

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